Bal Mazdoor Essay In Hindi

बाल श्रम या बाल मजदूरी पर निबंध Essay on Child Labour in Hindi

बाल मजदूरी को दूर और रोकने के लिए पुरे विश्व भर में मुहीम छिड़ चूका है। बाल मजदूरी किसी भी देश के समाज के लिए एक अभिशाप बन गया है क्योंकि इससें बच्चों का भविष्य खराब होता है। बाल श्रम एक बहुत बड़ा कारण है जिसके कारण आज विश्व में कई देश विकसित नहीं हो पा रहे हैं। बच्चे ही भविष्य को और बेहतर और नई ऊँचाइयों पर ले कर जायेंगे और यही बच्चे अगर छोटी उम्र में शिक्षा के बजाय लोगों के घर और दुकानों में काम करने लगेंगे तो देश कैसे उन्नत करेगा।

भारतीय कानून के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी कारखाने, ऑफ़िस या होटल में काम करवाना क़ानूनन अपराध है। यहाँ तक की भारत में आज भी ज्यादातर जगहों में बाल मजदूरी कराया जा रहा है जिसके कारण बच्चे अशिक्षित रह जा रहे हैं और इस प्रकार मानवाधिकार का उल्लंघन बार-बार हो रहा है। आज भी कई प्रकार के नए नियम और कानून निकलने पर भी बाल मजदूरी भारत में कई छोटे व्यापार, होटल, साफ़-सफाई, दुकानों में हो रहा है। यह बहुत ही शर्म की बात है क्योंकि बाल मजदूरी के कारण ही समाज में असाक्षरता, बेरोज़गारी और गरीबी को दूर करना और मुश्किल होते जा रहा है।

बाल श्रम या बाल मजदूरी पर निबंध Essay on Child Labour in Hindi

विषय सूचि

बाल मजदूरी के कारण Causes of Child Labour in Hindi

  • गरीबी के कारण गरीब माता-पिता अपने बच्चों को घर-घर और दुकानों में काम करने के लिए भेजते हैं।
  • दूकान और छोटे व्यापारी भी बच्चों से काम तो बड़े लोगों के जितना करवाते हैं परन्तु दाम उनसे आधा देते हैं क्योंकि वो बच्चे हैं।
  • बच्चे ज्यादा चालाक नहीं होते हैं इसलिए ज्यादा चोरी और ठग का अवसर नहीं मिलता है।
  • व्यापार में उत्पादन लागत कम लगने के लोभ में भी कुछ व्यापारी बच्चों का जीवन बर्बाद कर देते हैं।
  • बच्चे बिना किसी लोभ के मन लगा कर काम करते हैं।

बाल मजदूरी रोकने के उपाय Solutions to Child Labor in Hindi

  • बाल मजदूरी के लिए और मजबूत तथा कड़े कानून बनाने चाहिए जिससे कोई भी बाल मजदूरी करवाने से डरे।
  • आम नागरिक को भी बाल मजदूरी के विषय में जागरूक होना चाहिए और अपने समाज में होने से रोकना चाहिए।
  • गरीब माता-पिता को भी अपने बच्चों की शिक्षा में पूरा ध्यान देना चाहिए क्योंकि आज सरकार मुफ्त शिक्षा, खाना, और कुछ स्कूलों में दवाइयों जैसी चीजों की सुविधाएँ भी प्रदान कर रही है।
  • कारखानों और दुकानों के लोगों को प्रण लेना चाहिए की वो किसी भी बच्चे से मजदूरी या श्रम नहीं करवाएंगे और काम करवाने वाले लोगों को रोकेंगे।

परिणाम Conclusion

एक बच्चे को 1000-1500 रुपए देकर बाल मजदूरी करवाने के कारण कई प्रकार के हानि होते हैं। इससे यह परिणाम निकलता है कि सबसे पहले तो वह बच्चा अशिक्षित रह जाता है, देश का आने वाला कल और अंधकार की और जायेगा, साथ ही बेरोजगारी और गरीबी और बढ़ेगा। अगर देश का आने वाला कल इतना बुरा होगा तो इसमें हम सभी का घाटा ही तो है।

क्या आप बाल श्रम या बाल मजदूरी के बारे में जानना चाहते हैं? क्या आप बाल श्रम के खिलाफ बने क़ानून के बारे में जानना चाहते हैं?
क्या आप बाल श्रम पर निबंध लिखना चाहते हैं?
अगर हाँ, तो आइए जानते हें की बाल श्रम क्या है और इसे रोकने के उपाय क्या है?

विषय सूचि

बाल श्रम पर निबंध: Essay on Child Labour in Hindi:

बाल मजदूरी या बाल श्रम बच्चों के द्वारा अपने बाल्य काल में किया गया श्रम या काम है जिसके बदले उन्हें मजदूरी दिया जाता है | बाल मजदूरी भारत समेत हर देश में गैर कानूनी है| बाल मजदूरी एक कलंक है|

बाल मजदूरी एक अभिशाप है जो अपना जाल पूरा देश में इस तरह से बिछा दिया है की प्रशासन की लाख कोशिश के बावजूद ये अपना तांडव मचाने में सफल हो रहा है|

बाल मजदूरी हमारे समाज के लिए एक कलंक बन गया है| आइए जानते हें की बाल मजदूरी क्या है और इसको रोकने के उपाय के बारे में|

बाल मजदूरी या बाल श्रम क्या है? What is Child Labour?

किसी भी बच्चे से उसके या उसकी बाल्यकाल के दौरान पैसों या अन्य किसी लोभ के बदले करवाया गया किसी भी प्रकार के कार्य को बाल मजदूरी या बाल श्रम कहा जाता है| इस तरह के मजदूरी पर ज्यादातर पैसों या जरूरतों के बदले काम किया जाता है|

बाल श्रम पूरी तरह गैर कानूनी है| इस तरह की मजदूरी को समाज के हर बर्ग द्वारा निन्दित भी किया जाता है| लेकिन इसकी ज्यादातर अभ्यास हम समाज वाले ही करते हें|

हम बाल श्रम उन कार्यों को नाम दे सकते हें जो की कोई बच्चे को अपने बाल्यकाल से बंचित कर उन्हें मजबूरी में काम करने की और ढकेले| बाल श्रम गैर कानूनी है|
बच्चों को अपने परिवार से दूर रख उन्हें गुलामों की तरह पेश आना को भी बाल अत्याचार कहा जा सकता है|

बाल श्रम या बाल मजदूरी के कारण क्या हें? What are The Main Causes of Child Labour In India?

आज बाल श्रम की रीति पुरे देश में फ़ैल चुकी है| हमारे समाज के लिए बाल श्रम एक अभिशाप है| सरकार की कड़े से कड़े नियमों के बावजूद ये गन्दी आदत समाज से कभी छुटी ही नहीं|
बाल मजदूरी के कई कारण | आइए जानते हें की बाल मजदूरी के कारण क्या क्या हैं?

        1.गरीबी के कारण बढती बाल मजदूरी:

भारत देश की ज्यादातर आबादी गरीबी से पीड़ित हें| कुछ परिवारों में भर पेट खाना एक सपना सा है| गरीबी में इन पीडीतों ने कई बार अपनों को खोने के गम से भी अवगत हो चुके हें| बस इसी गरीबी से थक कर कई परिवार के बच्चे अपने बाल्यकाल की त्याग कर मजदूरी के लिए निकल पड़ते हें| ये निर्णय उनका बस अपने परिवार के पेट पालने के उद्देश्य से ली जाती है|लेकिन कभी कभी ली गयी इस तरह की निर्णय बच्चों के शारीरिक और मानसिक अवस्था को झकझोर देती है|

       2.किफायती स्कूल और पढाई की अन्य श्रोत के कमी भी बाल श्रम को उत्पन्न करती है:

हमारे देश की आजादी के इतने साल बाद भी कुछ इलाके ऐसे हें जहां के बच्चे आज तक सिक्षा जैसी मौलिक अधिकार से बंचीत हें| हमारे देश में आज भी ऐसी हज़ारों गाँव हें जहाँ पढाई की कोई ढंग की व्यवस्था नहीं है| और अगर है भी तोह कोशों दूर| इस तरह की प्रशासनिक ढीलापन भी बाल श्रम के लिए जिम्मेदार हें| और इन सबसे अगर कोई सबसे ज्यादा पीड़ित है तो वह है गरीब परिवार जो अपने बच्चों को पढ़ाना एक सपना के तरह देखते हें|

जी हाँ ! कभी कभी गरीब बच्चों की पढाई के लिए उनके गुज़ारे को मद्दे रख पढाई के लिए कोई किफायती स्कूल की कमी बच्चों को अनपढ़ और बेबस छोड़ जाती है| बस इसी बेबसी और अनपढ़ रहना उन्हें मानसिक रूप से कई बार छू जाती है| बच्चे बिना पढाई के जिंदगी जीने के लिए मजबूर हो जाते हें| और कभी कभी इस तरह की मजबूरियाँ उन्हें बाल मजदूरी की खाई में ढकेल देती है, जिससे आज तक किसी का भी भला नहीं हुआ है और ना ही कभी होगा|

       3.बाल श्रम को रीति का नाम देना भी बाल मजदूरी को अंजाम देता है:

चौंकाने वाला मगर एक कड़वा सच हमारे समाज का ये भी है की कई परिवारों में बाल श्रम को परम्परा या रीति का नाम दे इसको बड़ी ही आसानी से अंजाम दिया जाता है|

कई परिवार का यह मानना है की उनके नसीब में एक अच्छी जिंदगी कभी लिखी ही नहीं गयी और अर्शों से चली आती मजदूरी की परम्परा ही उनका कमाई और जीवन ब्यतीत का एक मात्र श्रोत है|

कुछ परिवारों का ये भी मानना है की बाल्यकाल से श्रम करना या काम करना बच्चे की आने वाली जिंदगी में उसे और ज्यादा मेहनती और दुनियादार बना देगा| उनका ये मानना है की बाल मजदूरी उनके निजी विकास को जन्म देती है| जो की आगे जिंदगी जीने में आसान होगा|

       4. लड़का और लड़की में भेदभाव बाल श्रम का एक अन्य श्रोत है:

हम समाज वाले न जाने ये क्यूँ अपने जहन में ये बिठा दिए हें की लडकियां लड़कों के मुकाबले कमजोर हैं और उनकी कोई समानता नहीं है| आज भी हमारे समाज में हमें ऐसे कई उदाहरण देखने को मिलेंगे जहाँ लड़कियों को पढाई से बंचीत रखा जाता है| और ये अंधी गली धीरे धीरे बाल श्रम की और जा के ही रुकता है जिसके बाद आता है बेवकूफी और दक्यानुसी सोच की मैदान जहां इंसानियत का पौधा की आश करना भी बेवकूफी होगी|

लड़कियों को लड़कों के मुकाबले कमजोर मानना उन्हें स्कूल और पढ़ाई से बंचित करती है और श्रमिक परिवारों में इन बच्चियों को अपने माता पिता के साथ मजदूरी करते पाया जाता है|

हमें लड़का लड़की में कोई अंतर नहीं करना चाहिए| (पढ़िए लड़का लड़की एक समान और बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध) इस अभ्यास से लड़कियों द्वारा बाल श्रम की संख्या कुछ हद्द तक घटाया जा सकता है|

बाल श्रम को रोकने के उपाय या बाल श्रम के समाधान: How to STOP Child Labour Practice?

बालमजदूरी हमारी समाज के लिए एक अभीशाप है जो की हमारे समाज को कभी अन्याय मुक्त बन्ने नहीं देगा| आज अगर हम अपने चारों तरफ देखें, तोह हमें ऐसे कई उदाहरण मिलेंगे जहां हमारे ही समाज के बच्चे अपने बाल्यकाल और बचपन को त्याग मजदूरी आकर रहे हें| मजदूरी दो वक़्त की रोटी के कारण| न जाने ये दिल दहलाने वाले दृश्य बाल श्रम को बढ़ावा देने वालों को कैसे हजम हो जाती है|
हमें बाल श्रम या बाल मजदूरी को रोकने के बारे में ज्यादा से ज्यादा चर्चा करना चाहिए| हमें लोगों को बाल श्रम के क़ानून के बारे में बताना चाहिए|
आइए जानते हें की बाल श्रम को कैसे रोकें और बाल श्रम समस्या का समाधान क्या है?

बाल मजदूरी रोकने के लिए हमें अपनी खुद सोच को बदलना होगा:

हमें बाल मजदूरी अपर अंत लाने के लिए ये सुनिश्चित करना होगा की सबसे पहले हम खुद अपने घर या दफ्तर में कोई भी नाबालिक या नाबालिका के उम्र की बच्चे को काम पे न रखें| हमें ये बात याद रखना होगा की बाल्यकाल की कच्चे उम्र के बच्चों को काम पे रख कर उन्हें उसके बदले चन्द पैसे या कुछ खाना दे कर उन पर कोई एहसान नहीं कर रहे हें, बाकि हम उस बच्चे के सुनहरे भविष्य के साथ खेल रहे हें| हमें ये सोच सबसे पहले अपने आप में लाना होग

हमें एक सचेतित ग्राहक का किरदार निभाना पड़ेगा:

कई बार हम बाज़ार जा कर अपने जरुरत की सामान खरीद लेते हें बिना ये जाने की उस सामान के बनावट के पीछे कोई बाल श्रम की अभ्यास है या नहीं| हो सकता है ये सोच आपको थोडा अयोग्य लगे लेकिन इससे हमारी समाज में एक बड़ी बदलाव लाया जा सकता है|

क्यूँ न आज से एक आदत डाल दें की जब भी हम कोई सामान की खरीद करते हैं तो उसके बनायी हुई तकनीक के बारे में अपने दुकानदार से पूछें| ज्यादातर दूकान दारों को शायद ये सवाल का जवाब पता न हो क्यूंकि कई बार कुछ चीजों की सप्लाई इतनी हाथों से हो के आती है की ये सब का अनुमान लगाना भी मुस्किल हो| लेकिन हम अपने तरफ से एक कदम तो उठा सकते हें| हम ये पुछ के समाज में एक सचेतन की माहौल तो पैदा कर सकते हें| और बाल श्रम की बनायी हुई कोई चीज़ की इस्तेमाल को ‘ना’ कहें|

बाल मजदूर करते बच्चों के परिवार वालों को इसके अंजाम से अवगत करायें:

अगर हम अपने आस पास कहीं बाल श्रम को पायें तो सबसे पहले हमें उस बच्चे की परिवार वालों से बात करनी चाहिए| उनके हालत को समझ के उन्हें अपने बच्चे की सुनहरे भविष्य के बारे में बताना चाहिए| उन्हें अपने बच्चे की भविष्य के बारे में अवगत कराना चाहिए| उन्हें बाल श्रम के नुक्सान और कानूनी जुर्म के बारे में बताना चाहिए|

बाल श्रम के खिलाफ कानूनी सिकायत दर्ज करनी चाहिए:

आज हमारे देश में बाल मजदूरी से लाधने के लिए बाल श्रम के क़ानून है| अगर हमें बाल श्रम की कोई मामला नज़र में आए तो हमें तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या (N.G.O.) के पास जा कर अपनी शिकायत दर्ज करवानी चाहिए| हमें बाल श्रम को पनाह देने वाले पत्थर दिलों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करनी चाहिए|

हम बाल श्रम के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन को 100 डायल कर भी कर सकते हें, या फिर हम खुद जा कर भी|

हम बाल श्रम के खिलाफ अपना शिकायात दर्ज करने के लिए सरकार के द्वारा शुरू की गई टेलीफोन सेवा नंबर 1098 डायल कर भी कर सकते हें|

1098 चाइल्ड हेल्पलाइन नामक की सेवा सरकार द्वार बालश्रम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए शुरू की गयी है|

विश्व बाल श्रम निरोध दिवस कब है? When is World Day Against Child Labour Celebrated? 

बाल्य काल हर इंसान की जिंदगी की गठन का मुख्य काल माना जाता है| कहते हें, की एक इंसान की बाल्यकाल की परवरिश और अनुभूति ही उसके आगे की जिंदगी को दर्शाता है| बाल श्रम एक कलंक है जो ऐसी बाल्यकाल को दुख:दाई कर जाती है|

इसी बाल्य काल में श्रम या मजदूरी करने या करवाने के खिलाफ पुरे विश्व में 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है|

 बाल मजदूरी या बाल श्रम क़ानून: Laws against Child Labour Practice In India:

हमारे देश में बाल श्रम की बुरी आदत दिन भर दिन बढती जा रही है| सरकारी और बेसरकारी (N.G.O.) स्संस्थाओं के लाख प्रयाशों के बावजूद बाल मजदूरी की अभ्यास में कोई कमी दिखाई नहीं दे रही है|

सरकार ने बाल श्रम को पूरी तरह निषेध करने के लिए कुछ कड़े नियमों का एलान भी किया है| आइए जानते हें बाल श्रम के क़ानून के बारे में:

           1. The Factory Act, 1948:-

फैक्ट्री एक्ट के अंतर्गत 14 साल की उम्र से निचे का कोई भी बच्चे को किसी भी फैक्ट्री में किसी भी तरह का काम करना निषेध है| इस नियम के अंतर्गत 15-18 वर्ष की आयु के बच्चे के किसी भी फैक्ट्री में काम करने पर कई तरह के पाबंदियां लगाई गयी है जैसे की कौन, किसी तरह के बच्चे और कितने देर तक काम करने की सीमा जैसे पाबंदियां

         2. The Mines Act, 1952:-

माइंस एक्ट के अंतर्गत 18 साल की उम्र से निचे का कोई भी बच्चे को किसी भी माइन में किसी भी तरह का काम करना निषेध है| माइंस की ख़तरा को मद्दे नज़र रखते सरकार ने इस कड़े नियम को लागू करने का प्रस्ताव किया था|

         3. The Child Labour (Prohibition and regulation) act 1986:-

सरकार ने बच्चों के लिए ख़तरा शाबित कुछ कार्यों की एक  सूची तैयार करी| इस नियम के अनुसार 14 साल की उम्र से निचे की बच्चों को सूची में स्थान पायी हुई किसी भी कार्य करने की निषेध है| ये सूची में 2006 और फिर 2008 को पुन: विचार किया गया था और विशेष बदलाव को स्थानित किया गया था|

          4. The Juvenile Justice (Care and Protection) of Children Act of 2000:-

इस क़ानून के अंतर्गत किसी भी बच्चे को बाल श्रम करने पर उकसाना या मजबूर करना या बाल मजदूरी करवाना कानूनी जुर्म है| इस क़ानून के अंतर्गत बाल मजदूरी करवाने वालों के लिए कठोर दंड है|

         5. The Right of Children to Free and Compulsory education Act, 2009:-

इस क़ानून के अंतर्गत 6-14 साल की उम्र के बच्चों के लिए मुफ्त की सिक्षा का व्यवस्था है| इस क़ानून के अन्दर हर प्राइवेट स्कूल पर 25% की सीट विकलांग बच्चों के लिए आरक्षित है|

बाल मजदूरी पर आलोचना या बहस? Debate on Child Labour Practice:

बाल मजदूरी आज भी एक बहस है जिसकी कई बार कई तरह के लोग फायदा उठाना चाहते हें|

हम लोग बच्चों के बाल्यकाल में उनसे करवाया गया किसी भी प्रकार की काम को बाल श्रम का नाम देते हें| लेकिन ये भी एक पक्ष है की बच्चों के द्वारा किया गया हर काम को बाल श्रम का नाम नहीं दिया जा सकता है| बच्चों की उन कार्यों पर भागीदारी जिन पर उनकी सेहत, पढाई, और उनकी निजी जिंदगी की विकास पर कोई बुरा असर न पड रहा हो, को बाल मजदूरी का नाम नहीं दिया जा सकता| इस तरह की कार्यों के अंतर्गत निचे दिए गए कार्यों की सूचि को हम उदाहरण के रूप में ले सकते हें:–

  • घर में अपने माता पिता के काम में हाथ बटाना को बाल मजदूरी नहीं कहा जा सकता है|
  • अपने पारिवारिक रोज़गार में घर वालों की मदद करना|
  • स्कूल या कॉलेज की पढाई से वक़्त निकाल कर कमाई का कोई श्रोत ढूंड कर अपने खर्चे चलाना बाल मजदूरी नहीं है|
  • खाली समय में अपने शौक या जरुरत के कारण बच्चों को पढ़ाना किसी भी रूप से बाल श्रम नहीं है|

इस तरह की काम बच्चों की निजी विकास में काफी बड़ा असर छोड़ता है और कई बार ये सब आदतें इंसान को जिम्मेदार भी बनाने में अहम् किरदार निभाते हें|

बाल श्रम पर कोई क़ानून फर्क नहीं लाएगा, जब तक हम अपने तरफ से कोई ठोस कदम न उठाएं| तो आइए आप और हम मिल के बाल श्रम के खिलाफ अपना आवाज़ बुलंद करें और अपने देश की सुनहरे भविष्य को सुरक्षित करने का एक मुहीम छेड़ें|

 

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